सकारात्मकता आत्मबल को बढ़ाता है : डॉ अजित
गिरीडीह। तनाव, डिप्रेशन, हाईपरटेंशन, आत्महत्या की प्रवृत्ति को समाज से खदेड़ ही देनी है। सकारात्मक माहौल में घर के आंगन और स्वयं दिल में खुशी के दीप को जलाए रखना है। जिंदगी हमें जिंदादिली से जीने को मिली है। इसे हम तनाव-डिप्रेशन के हवाले तो कतई नहीं करेंगे। खुशी रथ के इस आग्रह को केएन बक्शी बीएड कॉलेज बेंगाबाद के छात्र-शिक्षक व पचंबा गांव के ग्रामीणों ने खुले दिल से स्वीकारा। सभी ने एक स्वर में कहा, हम बनेंगे खुशी दूत, होगा हमारा खुशहाल परिवार और समाज। लाइफ केयर हॉस्पिटल, रांची और खुशी क्लास के तत्वावधान में बुधवार को केएन बक्शी बीएड कॉलेज बेंगाबाद में 531 वां खुशी क्लास व पचंबा गांव में 592 वां खुशी चौपाल सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन कर रहे बीएड कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ अजित सिंह ने कहा कि सकारात्मकता आपके आत्मबल और हौसले को जबरदस्त रूप से बढ़ाता है। खुशी रथ लेकर सुदूर गांव, घोर नक्सल प्रभावित इलाके में आकर खुशहाल जिंदगी जीने का मंत्र बताना काबिलेतारीफ है। सकारात्मकता के साथ अंधविश्वास, रूढ़िवाद से लड़ने की भी प्रेरणा मिल रही है। खुशी क्लास के संस्थापक मुकेश सिंह चौहान ने खुशी का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि हमेशा हंसते ही रहें। खुशी आपके आत्मशक्ति में छुपी है। किसी भी तरह के दर्द-पीड़ा, झंझवत का मुकाबला सकारात्मक भाव से करें। तनाव-निराशा खुद पर हावी न होने दें। खुशियों का स्वागत दिल खोल कर करें और मुश्किलों का सामना सकारात्मक भाव से करें। सही मायने में यही खुशी है। आप यकीन माने, गांवों से शहर है, शहर से गांव नहीं। चौहान ने बीएड कॉलेज के छात्रों से विशेष रूप से कहा कि अंक के दबाब में कभी नहीं आएं। दबाब यानी तनाव और तनाव कभी मंजिल बन ही नहीं सकता। सकारात्मकता के साथ खुशियों का दामन थामें आगे बढिए, मंजिल मिलना तय है। अंत में सभी से सकारात्मकता के साथ खुश रहने की अशीर्वादी मांगी गई। पंचम्बा खुशी चौपाल में पवन कंधवे ने कहा- खुशी रथ का दिल से स्वागत। हम अपने जिंदगी में खुशी संदेश को उतारने का भरपूर प्रयास करेंगे। वास्तव में नशा नाश करता है। अब गांवों में इसी खुशी संदेश का अलख जगाया जाएगा। मौके पर कृश्णा सिन्हा, प्रमोद पांडे, गोविंद राणा, बाजो साव, जुगल रॉय, जागो साव आदि मौजूद थें।


