कोयला मजदूरों के हित में निर्णय लेने की है आवश्यकता
कोल इंडिया में आउटसोर्सिंग राष्ट्र के लिए है खतरा : राघवन रघुनंदन
रामगढ़। हिन्द खदान मजदूर फेडरेशन के सहायक महामंत्री पद पर राघवन रघुनंदन को मनोनीत किया गया है। साथ ही कार्यकारिणी सदस्य के रूप में चंदेश्वर सिंह चुने गए हैं। उन दोनों मजदूर नेताओं का स्वागत शनिवार को रामगढ़ शहर में कोल्ड फील्ड मजदूर यूनियन के बैनर तले किया गया। लामैरिटल होटल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में हिन्द खदान मजदूर फेडरेशन के सहायक महामंत्री राघवन रघुनंदन ने केंद्र सरकार और कोल इंडिया प्रबंधन पर मजदूर हित में दबाव बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों से फेडरेशन का चुनाव नहीं हुआ था, जिसकी वजह से यह समिति निष्क्रिय हो गई थी। काफी लंबे अर्से के बाद समिति का पुनर्निर्माण हुआ है। एक बार फिर कोयला मजदूरों के हित में निर्णय लेने की आवश्यकता है। साथ ही कोयला मजदूरों के लिए आंदोलन और समझौता करने के लिए भी इस समिति ने संकल्प लिया है। कार्यक्रम का संचालन वेलफेयर बोर्ड के सदस्य रंजीत पांडे ने किया।
कोयला मजदूरों के समक्ष है कई गंभीर समस्या
राघवन रघुनंदन ने कहा कि आज कोयला मजदूरों के समक्ष कई गंभीर समस्याएं हैं। लेकिन सार्थक पहल नहीं होने की वजह से मजदूर परेशान हो रहे हैं। सबसे बड़ी विडंबना मेडिकल बोर्ड को लेकर है। ऐसे कई मजदूर हैं जिन्हें मेडिकल बोर्ड गठित कर अनफिट करने की आवश्यकता है, ताकि उनके आश्रितों को नौकरी मिल सके। लेकिन कोल इंडिया प्रबंधन कमेटी गठित नहीं कर वैसे कर्मचारियों को बीमार अवस्था में ही रख रही है। साथ ही उनका वेतन भी 50 फ़ीसदी ही भुगतान हो रहा है। इसके अलावा ऐसे कई कैडर कोल इंडिया में है जिनके पद पर लोगों का प्रमोशन नहीं हो पा रहा है। 17- 18 वर्षों में कई तकनीकी विकास हो चुके हैं। मशीनों का मॉडल बदल गया और कार्य करने के तरीके बदल गए। लेकिन मजदूरों को पुराने ही कैडर में रखा गया है, ताकि उनका विकास ना हो सके।
राष्ट्र के लिए खतरा है कोल इंडिया में आउटसोर्सिंग
राघवन रघुनंदन ने कोल इंडिया में आउटसोर्सिंग को राष्ट्र के लिए ही खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि संगठित मजदूरों के लिए कई यूनियन काम कर रहे हैं। लेकिन असंगठित मजदूरों के ऊपर लगातार खतरा मंडराता रहा है। कांग्रेस के शासनकाल में ही आउटसोर्सिंग की शुरुआत हुई थी। लेकिन मोदी गवर्नमेंट में आउटसोर्सिंग का विस्तार काफी बड़े पैमाने पर हो गया। यहां तक कि माइनिंग सेक्टर में भी आउटसोर्सिंग को डालकर इसे प्राइवेटाइजेशन की तरफ धकेल दिया गया है। कोयल का जब राष्ट्रीयकरण किया गया था, उसका जो मूल उद्देश्य था वह आउटसोर्सिंग की वजह से खत्म होता जा रहा है। संगठित मजदूर यूनियन ने असंगठित मजदूरों के लिए जेबीसीसीआई में भी मुद्दा उठाया था। तब कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों के लिए वेतनमान निर्धारित हुए थे। लेकिन चिंता की बात यह है कि समझौते के बावजूद वह मुद्दा लागू नहीं हो पाया। आज मजदूर हित में असंगठित मजदूरों को यूनियन के साथ एक मंच पर आना होगा ताकि मजदूर को न्याय मिल सके।


