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Home»झारखंड»बाबूलाल मरांडी की सरकार से दो मांग, सूर्या हांसदा मामले की CBI जांच हो और नगड़ी की जमीन आदिवासियों को लौटाई जाए
झारखंड

बाबूलाल मरांडी की सरकार से दो मांग, सूर्या हांसदा मामले की CBI जांच हो और नगड़ी की जमीन आदिवासियों को लौटाई जाए

डेस्क एडिटरBy डेस्क एडिटरAugust 25, 20253 Mins Read
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झारखंड…झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो प्रमुख मांगें रखी पहली, सूर्या हांसदा एनकाउंटर की सीबीआई जांच हो और दूसरी, रांची के नगड़ी इलाके की जमीन आदिवासियों को वापस सौंपी जाए। बाबूलाल मरांडी ने सूर्या हांसदा की मौत को एक सुनियोजित हत्या बताते हुए कहा कि 10 अगस्त की शाम उन्हें नावाडीह गांव से गिरफ्तार किया गया और ललमटिया महगामा ले जाते समय उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सूर्या को थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया, जो उनके शव को देखकर ही स्पष्ट हो जाता है।मरांडी ने बताया कि सूर्या हांसदा सिर्फ एक आम नागरिक नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति थे। वे बोरियो विधानसभा सीट से चार बार चुनाव लड़ चुके थे और क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ थी। वह अनाथ और असहाय बच्चों की मदद करते थे और उनका परिवार भी सामाजिक व राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है उनकी मां जिला परिषद की सदस्य रह चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के लोग सूर्या के खिलाफ दर्ज केसों का हवाला दे रहे हैं, जबकि 24 में से 14 मामलों में वह बरी हो चुके थे। जब से राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार बनी है, 2020 से 2025 के बीच उनके ऊपर 9 नए केस दर्ज किए गए। मरांडी का आरोप है कि सूर्या सिर्फ कोयला और बालू माफिया के खिलाफ खड़े थे, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया।उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच केवल सीबीआई ही कर सकती है और झारखंड के आदिवासी समाज की भी यही मांग है। “हम यह मांग विधानसभा में भी उठाएंगे,” उन्होंने जोड़ा।नगड़ी की जमीन पर भी तीखा रुख
बाबूलाल मरांडी ने नगड़ी की 227 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे विवाद पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यह आदिवासियों की भूईहरी और खेतीहर जमीन है, जिसे जबरन अधिग्रहित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि 1956-57 में बिहार सरकार ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के लिए इस जमीन का अधिग्रहण करना चाहा था, लेकिन विरोध के चलते उस समय के मुख्यमंत्री ने स्वयं जाकर किसानों से कहा कि वे अपनी जमीन पर खेती करते रहें।2012 में भी अधिग्रहण की कोशिश हुई, तब भी ग्रामीणों के विरोध के कारण सरकार को पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने सूचना अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत बीएयू से अधिग्रहण संबंधित दस्तावेज मांगे थे, लेकिन बीएयू ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके पास कोई अधिकृत दस्तावेज नहीं है और उन्होंने जमीन अधिग्रहित नहीं की है। मरांडी ने मांग की कि राज्य सरकार विधानसभा में सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे कि नगड़ी की यह जमीन रैयतों से नहीं छीनी जाएगी, उनका रसीद कटेगा और वे वहां अपनी खेती-बाड़ी जारी रख सकेंगे। उन्होंने कहा, “ये दोनों ही मुद्दे सीधे तौर पर झारखंड के आदिवासी समाज से जुड़े हुए हैं और हम इनके लिए सड़कों से लेकर सदन तक आवाज़ उठाते रहेंगे।”

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