New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और उसके संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि मौजूदा परिभाषा के अनुसार संरक्षण का दायरा सीमित हो सकता है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का खतरा है।
केंद्र सरकार से मांगे जवाब
कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से कई अहम तकनीकी सवालों पर जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि 20 नवंबर के आदेश को लागू करने से पहले एक निष्पक्ष और स्वतंत्र समीक्षा करना जरूरी है।
हाई पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी का प्रस्ताव
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं की जांच के लिए हाई पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह कमेटी खनन के पर्यावरणीय प्रभाव, अरावली रेंज की परिभाषा की सीमाएं और संरक्षण की निरंतरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की जांच करेगी।
अगली सुनवाई
अरावली मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी। सुप्रीम कोर्ट की इस पहल का उद्देश्य अरावली रेंज के संरक्षण को सुनिश्चित करना और पर्यावरणीय सुरक्षा को मजबूत बनाना है।


