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Home»देश-विदेश»सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर बड़ा फैसला सुनाया : पूरे कानून पर रोक से इनकार, एक प्रावधान पर स्थगन
देश-विदेश

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर बड़ा फैसला सुनाया : पूरे कानून पर रोक से इनकार, एक प्रावधान पर स्थगन

डेस्क एडिटरBy डेस्क एडिटरSeptember 15, 20253 Mins Read
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देश-विदेश..सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कानून की पूरी तरह रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया, लेकिन एक विवादास्पद प्रावधान पर स्थगन आदेश जारी किया। चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि कानून पर केवल दुर्लभतम मामलों में ही रोक लगाई जा सकती है। कोर्ट ने प्रत्येक धारा की प्रथम दृष्टया जांच की और पाया कि पूरे कानून पर रोक का कोई आधार नहीं बनता।

तीन प्रमुख मुद्दों पर अंतरिम फैसला

कोर्ट ने निम्नलिखित तीन मुद्दों पर अंतरिम आदेश दिए :

  • क्या वक्फ घोषित संपत्तियों को अदालतें वक्फ सूची से हटा (डिनोटिफाई) सकती हैं?
  • क्या कोई संपत्ति उपयोग के आधार पर (वक्फ बाय यूजर) या दस्तावेज से (वक्फ बाय डीड) वक्फ घोषित की जा सकती है?
  • अगर अदालत ने पहले संपत्ति को वक्फ घोषित किया हो, तो क्या सरकार बाद में उसे सूची से हटा सकती है?

गैर-मुस्लिमों की संख्या पर सीमा

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य वक्फ बोर्डों और केंद्रीय वक्फ परिषदों में गैर-मुस्लिमों की संख्या तीन से अधिक नहीं हो सकती।

एक प्रावधान पर रोक

कोर्ट ने उस प्रावधान पर रोक लगा दी, जिसमें पिछले पांच वर्षों से इस्लाम का पालन करने वाले व्यक्ति ही वक्फ बना सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान तब तक स्थगित रहेगा, जब तक नियम नहीं बन जाते कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं।

फैसला 22 मई को सुरक्षित रखा गया था

यह फैसला वक्फ संशोधन अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने 22 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं और अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया था।

सरकार का मजबूत बचाव

केंद्र सरकार ने कानून का कड़ा बचाव किया। सरकार का कहना था कि वक्फ एक ‘धर्मनिरपेक्ष’ व्यवस्था है और संसद द्वारा पारित कानून को संविधान-सम्मत माना जाना चाहिए। 25 अप्रैल को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने 1,332 पन्नों का हलफनामा दाखिल कर कोर्ट से कानून पर रोक न लगाने की अपील की। सरकार ने जोड़ा कि वक्फ इस्लामी अवधारणा तो है, लेकिन इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह अधिनियम ऐतिहासिक कानूनों और सांविधानिक सिद्धांतों के विपरीत है। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों पर गैर-कानूनी नियंत्रण करना है।

कानून का सफर

केंद्र सरकार ने 8 अप्रैल को वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को अधिसूचित किया था। इससे पहले 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दी। लोकसभा ने 3 अप्रैल और राज्यसभा ने 4 अप्रैल को विधेयक पारित किया था।

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