झारखंड..राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मनोनीत किया है. इन नामित सदस्यों में उज्ज्वल देवराव निकम शामिल हैं, जो एक प्रसिद्ध विशेष सरकारी वकील हैं और कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों में अपनी भूमिका के लिए जाने जाते हैं. इनके साथ सी. सदानंदन मास्टे (केरल के वरिष्ठ समाजसेवी और शिक्षाविद), हर्षवर्धन श्रृंगला (भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं), मीनाक्षी जैन (एक प्रख्यात इतिहासकार और शिक्षाविद) को मनोनीत किया गया है. ये नामांकन राज्यसभा के पूर्व नामित सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्तियों की पूर्ति के लिए किए गए हैं.
उज्ज्वल निकम का जन्म 30 मार्च 1953 को महाराष्ट्र के जलगांव में हुआ था. उनके पिता देवराव माधवराव निकम वकील थे और मां विमलादेवी स्वतंत्रता सेनानी थीं. उज्ज्वल निकम ने पहले साइंस में ग्रैजुएशन किया और फिर जलगांव के एसएस मनियार लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री ली. वह देश के कई बड़े आपराधिक मामलों में सरकारी वकील रहे हैं. 1991 में उन्होंने कल्याण बम धमाके के आरोपी रविंदर सिंह को सजा दिलाई. उनका करियर 1993 में मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट मामले से नया मोड़ लेता है. 26/11 हमले में पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब के मुकदमे में भी उन्होंने सरकारी वकील के रूप में बहस की और कसाब को फांसी की सजा दिलवाई.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं. इनमें से 238 सदस्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से चुने जाते हैं, वहीं 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं. ये नामांकन अनुच्छेद 80(1)(a) और 80(3) के तहत किए जाते हैं. राष्ट्रपति केवल उन्हीं लोगों को राज्यसभा में नामित कर सकते हैं जिन्होंने साहित्य, विज्ञान, कला या सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान दिया हो.


