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Home»झारखंड»बारिश और हाथी का कहर: बारिश और हाथियों की दोहरी मार से बेहाल किसान, खेतों में डूबी उम्मीदें
झारखंड

बारिश और हाथी का कहर: बारिश और हाथियों की दोहरी मार से बेहाल किसान, खेतों में डूबी उम्मीदें

खबरबोल एडिटरBy खबरबोल एडिटरJuly 28, 20252 Mins Read
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पूर्वी सिंहभूम। जिले के बहरागोड़ा और चाकुलिया प्रखंड के किसान इन दिनों कुदरत की दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ लगातार हो रही बारिश से खेत जलमग्न हैं, तो दूसरी ओर जंगली हाथियों का आतंक उनकी बची-खुची फसलों को भी रौंद रहा है। इस संकट ने किसानों की कमर तोड़ दी है और उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

बहरागोड़ा प्रखंड के चित्रेस्वर, रांगुनिया, पाचांडो, गुहियापाल, महुलडंगरी और बामडोल गांवों में स्वर्णरेखा नदी और रांगड़ो नाला के उफान से खेतों में पानी भर गया है। हाल ही में की गई धान की रोपाई पूरी तरह से डूब चुकी है। लगभग 15 बीघा फसल पानी में समा गई है। किसानों को डर है कि यदि जलभराव इसी तरह बना रहा, तो पौधे सड़ जाएंगे और सारी मेहनत बर्बाद हो जाएगी।

सोमवार को किसान प्रियलाल लेंका, हेमंत घोष, बिजय शामल, तापस घोष सहित अन्य कई किसान ने बताया कि हर साल हम अच्छी बारिश का इंतजार करते हैं, लेकिन इस बार बारिश ने हमारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेतों में जो हरियाली उगी थी, अब वह सड़ने लगी है।

इसी बीच चाकुलिया प्रखंड के कलसीमूंग गांव में रविवार रात दो जंगली हाथियों ने धान की बिचड़ों को रौंदकर बर्बाद कर दिया। किसान सुनील गोप, लखींद्र गोप, गुरुचरण खिलाड़ी और प्रफुल्ल महतो ने बताया कि ये हाथी अक्सर पश्चिम बंगाल के जंगलों से निकलकर गांवों में तबाही मचाते हैं। ग्रामीणों को अब शाम होते ही घरों में कैद हो जाना पड़ता है, क्योंकि हर वक्त जान का खतरा बना रहता है।

सब्जी की फसलें भी इस त्रासदी से अछूती नहीं रहीं। भिंडी, टमाटर, करेला, लौकी जैसी फसलें जो बाजार में बिकने को तैयार थीं, पानी में डूब गई हैं। अब किसान न तो फसल बचा पा रहे हैं और न ही उसे बेचने की उम्मीद बाकी रह गई है।

स्थिति इतनी गंभीर है कि किसानों ने प्रशासन से तत्काल मुआवजा और फसल बीमा के तहत राहत की मांग की है। लेकिन अब तक कोई सरकारी प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा है, जिससे किसानों में गहरी निराशा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते राहत नहीं मिली, तो आने वाले दिनों में गांवों में भुखमरी जैसे हालात बन सकते हैं।

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