Ranchi : झारखंड और बिहार के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर 53 वर्षों से चला आ रहा विवाद आखिरकार सुलझ गया है। मंगलवार को बिहार कैबिनेट ने सोन नदी जल बंटवारे से जुड़े एमओयू (समझौता ज्ञापन) प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस समझौते के तहत सोन नदी के कुल जल में से झारखंड को 2 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) और बिहार को 5.75 एमएएफ पानी मिलेगा।
केंद्रीय स्तर पर बनी सहमति
सोन नदी जल विवाद के समाधान की दिशा में यह अहम पहल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुई बैठक के दौरान सामने आई, जिसमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य का पक्ष मजबूती से रखा। इस बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी शामिल थे। समझौते से झारखंड में सिंचाई और पेयजल योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
कनहर बराज बना था विवाद का केंद्र
झारखंड में प्रस्तावित कनहर बराज इस विवाद का प्रमुख केंद्र रहा है। वर्ष 2017 में झारखंड हाईकोर्ट ने इस परियोजना के लिए डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने का निर्देश दिया था। इस बराज में सोन, उत्तर कोयल और काव नदियों का पानी एकत्र किया जाना प्रस्तावित है। इन तीनों नदियों का जलग्रहण क्षेत्र झारखंड में अधिक होने के कारण राज्य सरकार लंबे समय से अधिक जल हिस्सेदारी की मांग कर रही थी।
1973 से उलझा था मामला
सोन नदी जल विवाद की शुरुआत वर्ष 1973 में हुई थी, जब बाणसागर परियोजना के तहत मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तत्कालीन एकीकृत बिहार के बीच जल बंटवारे का समझौता हुआ था।
उस समय तय हुआ था—
- बिहार: 7.75 एमएएफ
- मध्य प्रदेश: 5.25 एमएएफ
- उत्तर प्रदेश: 1.35 एमएएफ
वर्ष 2000 में झारखंड के गठन के बाद राज्य ने यह तर्क दिया कि सोन नदी का बड़ा हिस्सा उसके भू-भाग से होकर बहता है, इसलिए उसे भी जल में उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। बिहार सरकार 1973 के समझौते के आधार पर अपने पुराने अधिकार का दावा करती रही। इसी कारण यह विवाद करीब 26 वर्षों तक लंबित रहा।
अब जल बंटवारे का नया फार्मूला
- सोन नदी का कुल जल: 7.75 एमएएफ
- बिहार को मिलेगा: 5.75 एमएएफ
- झारखंड को मिलेगा: 2 एमएएफ
जल बंटवारे से क्या होंगे फायदे
- झारखंड में सिंचाई परियोजनाओं को गति मिलेगी
- पेयजल संकट से जूझ रहे इलाकों को राहत
- कनहर बराज जैसी परियोजनाओं का रास्ता साफ
- कृषि उत्पादन बढ़ने की संभावना
- झारखंड–बिहार के बीच अंतरराज्यीय विवाद का अंत


