कल दोपहर 2 बजे नेमरा पहुंचेगा शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर

सड़कों की मरम्मत और हेलीपैड का निर्माण किया गया
गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने दिल्ली पहुंचकर दी श्रद्धांजलि
नेमरा से लौटकर प्रिंस वर्मा
झारखंड की संघर्ष परंपरा के बट वृक्ष रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन हो गया है। दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में 4 अगस्त 2025 की सुबह को उन्होंने आखिरी सांस ल। झारखंड और देश के लोग सम्मान देते हुए उन्हें दिशोम गुरु कहते थे। इसका अर्थ होता है राह दिखाने वाला अथवा पथ प्रदर्शक। झारखंड में यही उपाधि 81 वर्षीय शिबू सोरेन को मिली हुई थी।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा, तैयारी तेज
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) में मंगलवार (पांच अगस्त) को होगा। दोपहर दो बजे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंत्येष्टि की तैयारी तेज कर दी गयी है। सड़कों की मरम्मत और हेलीपैड का निर्माण समेत अन्य कार्य जोरों पर हैं। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में इलाजरत गुरुजी ने आज सोमवार की सुबह 81 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। गुरु जी के निधन की खबर मिलते ही गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी दिल्ली पहुंचकर गुरु जी को श्रद्धांजलि देते हुए आत्मा की शांति की कामना की। परिजनों को ढांढस बंधाते हुए अपनी संवेदनाएं व्यक्त की।

सड़कों के बड़े-बड़े गड्ढे भरे गए
झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन के निधन की सूचना मिलते ही रामगढ़ के डीसी फैज अक अहमद मुमताज अंतिम संस्कार की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ नेमरा गांव पहुंचे। रामगढ़ से नेमरा गांव जाने के दरम्यान सिल्ली मोड़ तक जगह-जगह सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे थे। पथ निर्माण विभाग रामगढ़ के कार्यपालक अभियंता राजीव रंजन कुमार मुंडा के नेतृत्व में तत्काल काम शुरू किया गया। लगभग सात-आठ स्थानों पर टीम रोड रोलर, पेलोडर, ट्रक और अन्य सामानों के साथ मरम्मत कार्य में जुट गयी।
जाम में फंसे रहे पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री
नावाडीह रेलवे फाटक में मरम्मत का कार्य एक घंटे तक चला। इससे फाटक के दोनों ओर सैकड़ों गाड़ियों का जाम लग गया। झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद समेत जिले के आला अधिकारी भी जाम में फंसे रहे।
लुकइयाटांड़ मैदान में बना है हेलीपैड
शिबू सोरेन के अंतिम संस्कार में हेलीकॉप्टर से शामिल होने वालों के लिए भी व्यवस्था की जा रही है। लुकइयाटांड़ मैदान में हेलीपैड को ठीक कराया गया है। इस हेलीपैड के बगल में ही शिबू सोरेन के पिता शहीद सोबरन सोरेन की प्रतिमा स्थापित है।
पिता की हत्या के बाद बदला शिबू सोरेन का जीवन
हॉस्टल में पढ़ाई करने के दौरान शिबू सोरेन के पिता की हत्या कर दी गई। पिता की हत्या ने शिबू सोरेन को राजनीति की राह दिखाई. इसके बाद से ही उनके सामाजिक और राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। 1957 में शिबू के पिता सोबरन अपने एक सहयोगी के साथ दोनों बेटों के लिए हॉस्टल में चावल और अन्य सामान पहुंचाने जा रहे थे। इसी दौरान लुकरैयाटांड़ गांव के पास उनकी हत्या कर दी गई। पिता की हत्या के बाद शिबू सोरेन का पढ़ाई से मन टूट गया। इसके बाद शिबू सोरेन हजारीबाग में रहने वाले फारवर्ड ब्लॉक नेता लाल केदार नाथ सिन्हा के संपर्क में आए। कुछ दिनों तक छोटी-मोटी ठेकेदारी का काम भी किया। पतरातू-बड़काकाना रेल लाइन निर्माण के दौरान उन्होंने कुली का काम भी मिला। लेकिन उन्होंने यह काम छोड़ दिया। शिबू सोरेन ने सबसे पहले बड़दंगा पंचायत से मुखिया का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में जरीडीह विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़े, लेकिन इसमें भी सफलता नहीं मिली।

साल 1980: दुमका से शिबू सोरेन ने लड़ा लोकसभा चुनाव
1980 के दशक में शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति के जाने-पहचाने नाम हो चुके थे।1980 के लोकसभा चुनाव में वो दुमका से तीर-धनुष चुनाव चिह्न लेकर मैदान में उतरे।बिहार से अलग झारखंड को राज्य बनाने की मांग के साथ शिबू सोरेन ने पार्टी कार्यकर्ताओं ने दिशोम दाड़ी चंदा उठाने का अभियान शुरू किया। जिसके तहत उन्होंने प्रत्येक गांव के प्रति परिवार से एक पाव (250ग्राम) चावल और तीन रुपया नगद राशि देने की मांग की।
दुमका से 8 बार सांसद बने शिबू सोरेन
इस अभियान से जमा हुए पैसों से शिबू सोरेन से चुनाव लड़ा और जीता। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद शिबू सोरेन ने दूमका से चुनाव जीतने का कीर्तिमान ही बना दिया। शिबू सोरेन ने 1980, 1989, 1991, 1996, 2002, 2004, 2009 और 2014 में दुमका लोकसभा सीट के लिए चुनावी जीत हासिल की।


