दिल्ली। अरविंद केजरीवाल दिल्ली के दंगल में फिर से कूद पड़े हैं. ठीक उसी अंदाज में, जैसा वो चुनाव से पहले दिखाया करते थे. आखिर ऐसी क्या वजह रही कि उन्हें उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। दिल्ली हारने के कई महीनों बाद अरविंद केजरीवाल फिर पूरी रौ में दिखे.
दिल्ली सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक फिर उसी तरह किया अटैक.
आखिर ऐसा क्या हुआ कि केजरीवाल को दिल्ली के मैदान पर उतरना पड़ा.
दिल्ली में शिकस्त के बाद अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में डेरा डाल दिया था. वे दिल्ली आने से बचे, शायद वापसी का रास्ता तलाश रहे थे. लेकिन दिल्ली की अवैध झुग्गियों पर बुलडोजर चला तो अरविंद केजरीवाल पूरी टीम के साथ दिल्ली के दंगल में उतर गए. पहले दिल्ली सरकार, फिर केंद्र सरकार पर जमकर बरसे. कहा, ‘चुनाव से पहले मैंने दिल्ली के गरीबों और झुग्गीवालों के लिए वीडियो जारी करके कहा था कि अगर बीजेपी की सरकार आ गई तो यह एक साल में ही झुग्गियां तोड़ देंगे. आज वही हो रहा है. ये सारी झुग्गियां तोड़ने का इरादा लेकर आए हैं.’ मकसद साफ है कि केजरीवाल अब दिल्ली में दो-दो हाथ करने फिर उतर गए हैं. तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि केजरीवाल को फिर दिल्ली के दंगल में उतरने का मौका मिल गया?
झुग्गियों पर चला बुलडोजर तो केजरीवाल को क्यों चुभा, फिर दंगल में उतरे
अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के दंगल में उतरने का मौका मिल गया.
दरअसल, रेखा गुप्ता सरकार ने वो कार्ड चल दिया जो केजरीवाल के लिए मुसीबत बन सकता था. अगर वे इस वक्त नहीं बोलते, तो एक बड़ा वर्ग उनसे छूट जाता. केजरीवाल ने कहा, दिल्ली की झुग्गियों में 40 लाख लोग रहते हैं, अगर ये इकट्ठे हो गए तो किसी की औकात नहीं है जो आपकी झुग्गी तोड़ने आ जाए. सारा खेल इन 40 लाख लोगों यानी वोटर्स का है. विधानसभा चुनावों के आंकड़े देखें तो 2015 में AAP को स्लम‑वोट में लगभग 66 % मिला था. सीएसडीएस के सर्वे के मुताबिक, 2020 में आम आदमी पार्टी को 61 % वोट यहां मिले. लेकिन 2025 में आंकड़ा बदलता दिखा. सबसे ज्यादा स्लम वाली 10 सीटों में 7 बीजेपी को मिल गईं।
हार जीत तय करते यहां के वोटर
दिल्ली में 675 झुग्गी झोपड़ियां हैं, जहां तीन लाख परिवार रहते हैं. ये कॉलोनियां 62 विधानसभा क्षेत्रों में फैली हुई हैं. इन विधानसभा क्षेत्रों में करीब 40 फीसदी वोटर झुग्गी झोपड़ियों वाले हैं. ये जीत हार तय करने की स्थिति में हैं. केजरीवाल को लगता है कि अगर इन्हें छोड़ दिया तो दिल्ली का चुनाव आगे जीतना मुश्किल हो जाएगा. क्योंकि इनमें से बहुत सारे वोटर्स केजरीवाल के कोर वोटर्स रहे हैं. फ्री बिजली-पानी, बस यात्रा, मोहल्ला क्लीनिक जैसे सुविधाएं, इन लोगों को लुभाती रही हैं और केजरीवाल सरकार के ये बड़े लाभार्थी रहे हैं. अब झुग्गी झोपड़ियों पर बुलडोजर चलने का मतलब है कि इन वोटर्स में भय पैदा किया जा रहा है. केजरीवाल इसका लाभ लेना चाहते हैं।
बीजेपी बोली-कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने केजरीवाल की इस रैली पर तीखा पलटवार किया. उन्होंने कहा, यह हारे हुए ठुकराए हुए और दिल्ली से भगाए गए लोगों का जमावड़ा है. किराए के लोगों को बुलाकर भीड़ इकट्ठा की गई. नक्सलवादी विचारधारा मानने वाले लोग हैं. अरविंद केजरीवाल और उनकी पूरी टीम अराजकवादी लोग हैं जो हमेशा संविधान के खिलाफ जाकर बात करती है. गोपाल राय ने प्रधानमंत्री आवास को लेकर बयान दिया है, क्या वे प्रधानमंत्री आवास में घुसना चाहते हैं. मैं उन्हें चेतावनी देता हूं कि भाजपा के कार्यकर्ता कोई हाथ पर हाथ रख कर बैठने वाले नहीं हैं. बता दें कि केजरीवाल के नकारेपन की वजह से यह कार्रवाई हो रही है. हम कोर्ट के ऑर्डर पर यह कार्रवाई कर रहे हैं।


