रामगढ़। रामगढ़ अब सिर्फ अवैध कोयला तस्करी का केंद्र नहीं रहा। यह एक खतरनाक, संगठित और संरक्षित अपराध तंत्र का गढ़ बन चुका है। हालात इतने भयावह हैं कि यहां संचालित कुछ पावर प्लांट अब खुलेआम अवैध कोयले पर निर्भर हो गए हैं। कानून, नियम और प्रशासनिक आदेश सब इस काले खेल के सामने बौने साबित हो रहे हैं।
पावर प्लांट: काले कारोबार का “सेफ जोन”
जिले के पावर प्लांट अब अवैध कोयले की सबसे बड़ी खपत केंद्र बन चुके हैं। रात के अंधेरे में सैकड़ों टन कोयला बिना किसी वैध कागजात के प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है। कागजों में सब कुछ “क्लीन” दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि यह पूरा सिस्टम फर्जीवाड़े और सांठगांठ पर टिका हुआ है।
मौत की खदानों से निकल रहा काला सोना
रामगढ़ जिला के विभिन्न थाना क्षेत्रों के अलावे महुआटांड, उरीमारी, चरही और गिद्दी इलाकों में बंद पड़ी खदानें अब “मौत के कुएं” बन चुकी हैं। यहां बिना किसी सुरक्षा के, जान हथेली पर रखकर मजदूरों से अवैध खनन कराया जा रहा है।
हर दिन हादसे का खतरा, हर रात मौत का साया। लेकिन माफिया के लिए यह सिर्फ मुनाफे का खेल है।
माफिया, दलाल और सिस्टम का गठजोड़!
सूत्रों के अनुसार इस काले धंधे में अब केवल छोटे-मोटे तस्कर नहीं, बल्कि पुराने शातिर खिलाड़ी और नए चेहरे मिलकर एक मजबूत सिंडिकेट बना चुके हैं। मोबाइल नेटवर्क, गुप्त कॉल, व्हाट्सएप, फ़ेसटाइम और “लाइन सेटिंग” सब कुछ इतनी बारीकी से संचालित हो रहा है कि बिना अंदरूनी संरक्षण के यह संभव ही नहीं। स्थानीय सूत्र साफ कहते हैं कि बिना ऊपर तक सेटिंग के एक ट्रक भी नहीं हिल सकता।
प्रशासन की चुप्पी या मिलीभगत?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन अनजान है या जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है? कभी-कभार की जाने वाली कार्रवाई महज दिखावा साबित हो रही है। अवैध मुहानों को बंद करने की खबरें आती हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में वही मुहाने फिर चालू हो जाते हैं। यह सिलसिला साफ इशारा करता है कि कार्रवाई नहीं, बल्कि “मैनेजमेंट” चल रहा है।
वैध कारोबारी बर्बादी के कगार पर
इस अवैध नेटवर्क ने नियमों से काम करने वाले कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। जहां वैध कारोबारी कागजी प्रक्रिया और लागत में उलझे हैं, वहीं माफिया सस्ते अवैध कोयले के दम पर बाजार पर कब्जा जमा रहे हैं।
पर्यावरण और इंसानी जान पर सीधा हमला
यह अवैध खनन सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि पर्यावरण और इंसानी जीवन के खिलाफ खुला हमला है।जमीन धंसने का खतरा, जहरीली गैसें, अनियंत्रित विस्फोट यह सब एक बड़े हादसे की चेतावनी दे रहे हैं।
सिस्टम पर सबसे बड़ा सवाल
रामगढ़ में अवैध कोयला तस्करी अब “अपराध” नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी और संरक्षण का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है। जब तक इस नेटवर्क के असली संरक्षकों—माफिया, दलाल और सिस्टम में बैठे लोगों पर कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह काला साम्राज्य और भी खतरनाक रूप लेता जाएगा। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन जागेगा या रामगढ़ यूं ही माफिया के कब्जे में सिसकता रहेगा?


