कोयला माफियाओं के आगे बेबस दिख रहे वन विभाग और पुलिस, कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
रामगढ़/बोकारो। बोकारो जिले के महुआटांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित दूधमटिया क्षेत्र इन दिनों कथित तौर पर अवैध कोयला खनन और तस्करी का बड़ा केंद्र बन चुका है। स्थानीय लोगों और सूत्रों की मानें तो यहां दिन-रात बड़े पैमाने पर अवैध खनन का कारोबार संचालित हो रहा है। हैरत की बात यह है कि यह पूरा खेल भारी मशीनों की मदद से खुलेआम चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण कोयला माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार दूधमटिया क्षेत्र में प्रतिदिन 25 से अधिक हाईवा अवैध कोयला विभिन्न मार्गों से बाहर भेजा जा रहा है। कोयले की ढुलाई दिन और रात दोनों समय जारी रहती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि उन्हें कानून या प्रशासन का कोई भय नहीं रह गया है।
भारी मशीनों से धरती का सीना चीर रहे तस्कर
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन के लिए जेसीबी, पोकलेन और अन्य भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। मशीनों की गड़गड़ाहट के बीच कोयले का अवैध उत्खनन लगातार जारी है। इससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। खनन के कारण आसपास की जमीन कमजोर होने और भविष्य में दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है।
दबंगई के साथ चल रहा कारोबार, शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कोयला माफिया खुलेआम दबंगई के साथ अपना कारोबार चला रहे हैं। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि अवैध कारोबार से जुड़े लोगों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि आम ग्रामीण भी उनके खिलाफ खुलकर बोलने से कतराते हैं। कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
पुलिस और वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
दूधमटिया क्षेत्र में कथित तौर पर इतने बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध खनन और कोयला परिवहन को लेकर स्थानीय पुलिस एवं वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब प्रतिदिन दर्जनों हाईवा कोयला क्षेत्र से गुजर रहे हैं और भारी मशीनें लगातार काम कर रही हैं, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं होना संभव नहीं लगता। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय-समय पर प्रभावी छापेमारी और निगरानी की जाए तो इस अवैध कारोबार पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है। लेकिन अब तक की स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।
सरकार को राजस्व का नुकसान, पर्यावरण पर भी खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन और तस्करी के कारण सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। वहीं दूसरी ओर अनियंत्रित खनन से पर्यावरणीय क्षति, भूमि कटाव, जल स्रोतों पर प्रभाव तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खनन विभाग तथा राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अवैध खनन और कोयला तस्करी में संलिप्त लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र में कानून का राज स्थापित हो सके और प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर रोक लगाई जा सके।
प्रमुख सवाल
- दूधमटिया में रोजाना हो रहे अवैध खनन पर रोक क्यों नहीं लग रही?
- प्रतिदिन दर्जनों हाईवा कोयला किसकी निगरानी में क्षेत्र से बाहर जा रहा है?
- भारी मशीनों से हो रहे खनन की जानकारी संबंधित विभागों को क्यों नहीं है?
- आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है यह अवैध कारोबार?


