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Home»झारखंड»कैंसर पीड़ित मां को पीटा, बुजुर्ग पिता को भी नहीं बख्शा-बेटे की प्रताड़ना से तंग आकर दंपती धरने पर बैठे
झारखंड

कैंसर पीड़ित मां को पीटा, बुजुर्ग पिता को भी नहीं बख्शा-बेटे की प्रताड़ना से तंग आकर दंपती धरने पर बैठे

डेस्क एडिटरBy डेस्क एडिटरSeptember 3, 20253 Mins Read
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चक्रधरपुर …झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समाज को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है। चक्रधरपुर के झुमका मोहल्ला स्थित सज्जन गली में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती को अपने ही बेटे और बहू की प्रताड़ना से इतना पीड़ा पहुंचा कि उन्होंने सरेआम बीच चौक में धरने पर बैठने का फैसला किया। 65 वर्षीय अर्जुन प्रताप साव और उनकी 55 वर्षीय पत्नी शकुंतला देवी, जो कैंसर से पीड़ित हैं, उन्होंने अपने बड़े बेटे आलोक साव और बहू सुषमा पर मारपीट, मानसिक उत्पीड़न और घर से निकालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।धरना स्थल पर शकुंतला देवी के हाथ में एक तख्ती थी, जिस पर लिखा था “मैं कैंसर पीड़ित हूं।” यह दृश्य देखकर राह चलते लोगों की आंखें भर आईं, मगर अफसोस की बात यह रही कि उनकी इस स्थिति को देख उनके बेटे का दिल भी नहीं पसीजा। वहीं, अर्जुन साव ने भी एक तख्ती लेकर बेटे द्वारा की गई प्रताड़ना को लोगों के सामने रखा। अर्जुन साव के अनुसार, उन्होंने अपने बड़े बेटे आलोक के लिए पोस्ट ऑफिस रोड पर कपड़े की एक दुकान खुलवाई थी, जिससे उसे अच्छी आमदनी हो रही है। लेकिन अब वही बेटा आए दिन उनके साथ दुर्व्यवहार करता है। अर्जुन साव ने बताया कि उन्होंने जिस घर को खून-पसीने से बनाया था, उसी से उन्हें बाहर निकाल दिया गया। बीते 8-9 महीनों से वे एक किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं, जहां भी आलोक उन्हें मारने पहुंच जाता है। 29 अगस्त को भी उसने उनके साथ मारपीट की और सिर फोड़ दिया। इस मामले की शिकायत थाने में की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।अर्जुन साव ने बताया कि कोर्ट ने दोनों बेटों को आदेश दिया था कि वे माता-पिता को प्रति माह 5000 सहायता राशि दें। छोटा बेटा आशीष इस आदेश का पालन कर रहा है, लेकिन आलोक ने न तो अब तक कोई मदद की, और न ही माता-पिता को घर में वापस आने दिया। उल्टा केस दर्ज कराने के बाद आलोक ने अपने ही पिता को डंडों से बेरहमी से पीट डाला। शकुंतला देवी वर्ष 2021 से कैंसर से पीड़ित हैं, और उनके इलाज के लिए उन्हें समय-समय पर मुंबई जाना पड़ता है। शुरुआत में बेटों ने सहयोग किया था, लेकिन अब सभी ने उनसे नाता तोड़ लिया है। अर्जुन साव ने बताया कि वे कई बार पुलिस और प्रशासन से मदद की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं से कोई राहत नहीं मिली। दंपती का साफ कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और अपने घर में वापस बसाया नहीं जाता, तब तक वे धरना स्थल से नहीं हटेंगे।

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