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Home»झारखंड»मां-बाप अपने छोटे बच्चों को खाना खिलाकर नहीं, बल्कि नशा देकर कराते हैं चुपः बाबूलाल
झारखंड

मां-बाप अपने छोटे बच्चों को खाना खिलाकर नहीं, बल्कि नशा देकर कराते हैं चुपः बाबूलाल

डेस्क एडिटरBy डेस्क एडिटरAugust 26, 20253 Mins Read
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Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में आज जो दृश्य देखने को मिल रहा है, वह इतना व्यथित कर देने वाला है कि राजनीति से इतर इंसानियत तक पर सवाल खड़े कर रहा है.
घाटशिला के अंतर्गत पारुलिया और दुमका कोचा गांवों में हमारी अपनी ही जनजातियां, सबर और बिरहोर, आज भूख और लाचारी के उस अंधेरे में धकेल दी गई हैं, जहां मां-बाप अपने छोटे-छोटे बच्चों को खाना खिलाकर नहीं, बल्कि नशा देकर चुप कराते हैं.
नशे में जकड़े जा रहे बच्चे
सोशल मीडिया पोस्ट में आगे लिखा है कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए थे, उस उम्र में उन्हें नशे की आदत में जकड़ा जा रहा है, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं इनसे कोसों दूर हैं.
खुद को आदिवासी हितैषी बताने वाली सरकार को आज शर्म से सिर झुका लेना चाहिए. जिन आदिवासियों की आवाज पर यह सत्ता में आई, उन्हीं को जीवन और शिक्षा से वंचित छोड़ दिया गया. सबर और बिरहोर जनजातियां हमारी पहचान और अस्मिता का हिस्सा हैं. लेकिन भूख और नशे ने उन्हें लुप्त होने की कगार पर पहुंचा दिया है.
जनजातियों की सुध ले सरकार
झारखंड आज उस मुक़ाम पर है, जहां सत्ता में बैठे लोगों को आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है. और जो कोई इन बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए आवाज उठाना चाहता है, उसे एनकाउंटर में ख़ामोश कर दिया जाता है
सरकार से अनुरोध है कि उन जनजातियों की सुध लीजिए जिनके नाम पर आपने वोट लिए थे. प्रशासन को भी अपने स्तर पर आदिवासी समाज को इस नशे की कुरीति से दूर कर जागरूक करना होगा, यह हमारी आदिवासी सभ्यता के सरंक्षण के लिए अति आवश्यक है.
न्याय मांग रहे इन बच्चों का दर्द समझ पाना आसान नहीं
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सूर्या हांसदा प्रकरण का वीडियो शेयर करते हुए कहा है कि न्याय मांग रहे इन बच्चों का दर्द समझ पाना आसान नहीं है. सूर्या हांसदा इन बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे थे. इनकी शिक्षा में योगदान दे रहे थे. क्या यही उनका अपराध था?
क्या इसी वजह से एनकाउंटर की आड़ में उनकी हत्या कर दी गई?
सूर्या हांसदा के साथ इन बच्चों के भविष्य को भी न्याय दिलाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है. और यह ज़िम्मेदारी पूरी होने तक, सूर्या हांसदा के गुनहगारों को सज़ा मिलने तक हम चुप नहीं बैठेंगे. ताकि भविष्य में फिर कभी इन बच्चों को ऐसी तख़्तियां न उठानी पड़ें. फिर किसी आदिवासी उत्थान के लिए काम कर रहे व्यक्ति को पुलिस व सरकार की तानाशाही के चलते अपनी जान ना गंवानी पड़े.

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