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Home»झारखंड»रामगढ़»रक्षाबंधन की तैयारी: भाइयों की कलाई पर सजेगी हस्त निर्मित राखी
रामगढ़

रक्षाबंधन की तैयारी: भाइयों की कलाई पर सजेगी हस्त निर्मित राखी

खबरबोल एडिटरBy खबरबोल एडिटरAugust 3, 20252 Mins Read
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रामगढ़। जिले में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी रक्षाबंधन का त्योहार बेहद अनोखे तरीके से मनाया जाएगा। भाइयों की कलाई पर सखी मंडल द्वारा बनाई गई हस्त निर्मित राखी सजेगी। जिले में झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन समिति (जेएसएलपीएस) के तत्वावधान में राखी निर्माण के लिए दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

सखी मंडल की दीदियों के लिए राखी निर्माण आत्मनिर्भरता और रचनात्मकता का प्रतीक बनकर उभरा है

सखी मंडल की दीदियों के लिए राखी निर्माण आत्मनिर्भरता और रचनात्मकता का प्रतीक बनकर उभरा है। यह प्रशिक्षण रामगढ़ जिले के सीएमटीसी गोला में आयोजित किया गया। जिसमें जिले के सभी प्रखंडों से कुल 30 सखी मंडल की दीदियों ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सखी मंडल की दीदियों को राखी निर्माण के कौशल में दक्ष बनाना है। जिससे वे रक्षा बंधन के अवसर पर सुंदर और आकर्षक राखियों का निर्माण कर सकें। यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगी बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करती है।

राखी निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्री

प्रशिक्षण के दौरान दीदियों ने विभिन्न प्रकार की सामग्री का उपयोग करके राखियों का निर्माण किया। जिसमें मोती, जरी, गोटा, रेशम धागा, रुद्राक्ष और अन्य सजावटी वस्तुएं शामिल थीं। इन सामग्रियों का उपयोग करके उन्होंने सैकड़ों राखियों का निर्माण किया है‌। जो उनके कौशल और रचनात्मकता का प्रमाण है। निर्मित राखियों को सखी मंडल की दुकानों एवं विभिन्न स्टाल के माध्यम से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। प्रति राखी की दर 10 रुपए से 50 रुपए तक की होगी, जिससे स्थानीय लोगों को हस्त निर्मित सुंदर और आकर्षक राखियों की सुविधा मिलेगी। यह पहल दीदियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ स्थानीय बाजार में उनकी उपस्थिति को भी मजबूत करेगी।

भाई बहन के रिश्तों को मजबूत करेगी हस्त निर्मित राखी

रामगढ़ डीसी ने बताया कि भाई बहन के रिश्तों को मजबूत करने में हस्त निर्मित राखी सहायक होगी। रक्षा बंधन जैसे पावन पर्व पर दीदियों द्वारा निर्मित राखियों का उपयोग भाई-बहन के रिश्ते को और भी मजबूत बनाता है। यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी प्रोत्साहित करती है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से दीदियों को नए कौशल सिखाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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