
भारी बारिश में बह गए रामगढ़ के किसानों के सपने
रामगढ़। पिछले कई वर्षों से सुखाड़ की मार झेल रहे रामगढ़ जिले के किसानों के सपने इस वर्ष भारी बारिश में बह गए। किसानों को उम्मीद से ज्यादा नुकसान इस वर्ष में भी खेती में होता दिखाई दे रहा है। अगर धान की फसल को छोड़ दिया जाए तो दलहन, तेलहन, मोटा अनाज और मक्के की खेती में भारी नुकसान होने की संभावना है। कृषि विभाग ने जो आंकड़ा अभी तक तैयार किया है उसमें किसानों को होने वाले नुकसान की झलक साफ दिखाई दे रही है।
5145 हेक्टेयर भूमि में ही फसल लगाई जा सकी
रामगढ़ जिले में मक्के का व्यापार भी काफी अच्छा होता है। यहां इस वर्ष 9100 हेक्टेयर भूमि में मक्के की फसल लगाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन अभी तक 5145 हेक्टेयर भूमि में ही फसल लगाई जा सकी है। जबकि मक्के की खेती के लिए उचित समय जून महीना तक ही होता है। भारी बारिश की वजह से उस वक्त लगाई गई फसल नष्ट हो गई। किसानों ने दोबारा मक्के की फसल को लगाना शुरू किया।
अभी तक मात्र 28 फ़ीसदी आच्छादन हो सका है
दलहन की खेती में भी किसानों को अभी तक उम्मीद से ज्यादा नुकसान हुआ है। अभी तक मात्र 20 फ़ीसदी क्षेत्र में ही फसल लगाई जा सकती है। अरहर को छोड़ दिया जाए तो उड़द मूंग की फसल का आच्छादन मात्र 15 फ़ीसदी ही हुआ है। अरहर की खेती भी लक्ष्य से काफी कम है अभी तक मात्र 28 फ़ीसदी आच्छादन हो सका है।
तिल, सोयाबीन, सरगुजा की नहीं हुई रोपनी
तेलहन की खेती रामगढ़ जिले के किसानों को पूरे साल आमदनी देती रहती है। लेकिन यहां अभी तक तिल, सोयाबीन, सरगुजा जैसे मुख्य फसल का की खेती शुरू ही नहीं हुई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इसकी खेती जीरो फीसदी हैं। भारी बारिश की वजह से इन फसलों के लिए लगाए गए बिचड़े और बीज बह गए। अब किसानों में यह असमंजस है कि अगर वह दोबारा इसकी खेती करते हैं तो उत्पादन नहीं के बराबर होगा। कुछ किसानों ने मूंगफली लगाई है। लेकिन 1000 हेक्टेयर में होने वाली खेती अभी तक मात्र 160 हेक्टेयर में ही हो पाई है।
मोटा अनाज को लेकर किसानों को हुआ भारी नुकसान
झारखंड में मोटा अनाज किसानों की आमदनी बेहतर करता है। 1070 हेक्टेयर में होने वाली इस खेती पर नजर दौड़ाएं तो पता चलेगा कि किसान यहां भी मार खा गया है। अभी तक मात्र 6.5 फ़ीसदी आच्छादन हो पाया है। मडुवा, बाजरा, ज्वार की खेती भारी बारिश की वजह से चौपट हो गई है।
धान की फसल से बच सकती है किसानों की जेब
भारी बारिश ने धान की फसल को भी नुकसान पहुंचाया। लेकिन एक महीने की भारी बारिश के बाद जब मौसम खुला तो किसानों ने धान की फसल पर ही सबसे ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। 35000 हेक्टेयर में धान की खेती करने का लक्ष्य रखा गया था। वर्तमान समय में 12283 हेक्टेयर में फसल लग चुकी है। इसमें हाइब्रिड, अधिक उपजशील और उन्नत किस्म के धान लगाए गए हैं। किसानों ने सबसे अधिक उपजशील बीजों पर ही अपना ध्यान केंद्रित किया। 37 फीसदी आच्छादन अधिक उपजशील बीज के ही हुए हैं। हाइब्रिड बीज से 32.7 फ़ीसदी और उन्नत बीज से 33.9 फ़ीसदी भूमि आच्छादित हुई है।
मायूस ना हो किसान अभी भी कर सकते हैं दलहन और तेलहन की खेती
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ इंद्रजीत अभी भी किसानों को हिम्मत दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारी बारिश ने उन्हें काफी नुकसान पहुंचा है, लेकिन अभी भी दलहन और तेलहन की फसल किसान लगा सकते हैं। कुछ फसलों का समय बीत गया है, लेकिन अभी भी अगर उसकी खेती की जाए तो कुछ लाभ हो सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर लगाई गई फसल का उत्पादन अच्छा होता है। लेकिन बाद में भी लगी फसल किसानों का बैकबोन बन सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में किसान सिर्फ धन की खेती पर ही ध्यान दे रहे हैं। लेकिन उन्हें मक्का, सरगुजा, तिल की खेती भी करनी चाहिए, इससे उन्हें भविष्य में लाभ होगा।


