बीरू कुमार
रामगढ़। बीएफ़सीएल प्लांट से फैल रहे भीषण प्रदूषण के खिलाफ आज आक्रोश का सैलाब सड़कों पर उतर आया। प्रदूषण से त्रस्त सैकड़ों लोग पदयात्रा करते हुए सुभाष चौक पहुंचे, जहां उन्होंने धरना देकर प्लांट प्रबंधन और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की। पूरे इलाके में जनआक्रोश का माहौल देखने को मिला।
“साँसें तो चल रही हैं, लेकिन घुट-घुटकर”
धरना स्थल पर मौजूद लोगों का दर्द उनके नारों और शब्दों में साफ झलक रहा था। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने कहा कि
“हम ज़िंदा तो हैं, लेकिन साँसें घुट-घुटकर चल रही हैं। यह कोई ज़िंदगी नहीं, सिर्फ़ बीमारी और डर का इंतज़ार है।”
लोगों का आरोप है कि बीएफ़सीएल प्लांट से निकलने वाला धुआं, राख और जहरीले कण आसपास के गांवों और बस्तियों को लगातार बीमार बना रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
प्लांट प्रबंधन और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाज़ी
प्रदर्शनकारियों ने प्लांट प्रबंधन पर प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की खुलेआम अनदेखी करने का आरोप लगाया। साथ ही जिला प्रशासन पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
हर बार सिर्फ़ आश्वासन दिए गए।
प्रदूषण नियंत्रण के दावे ज़मीन पर खोखले साबित हुए
धरना स्थल पर “बीएफ़सीएल जवाब दो”, “प्रदूषण बंद करो”, “हमें ज़हर नहीं, ज़िंदगी चाहिए” जैसे नारे गूंजते रहे।
पूर्व विधायक शंकर चौधरी भी हुए शामिल
प्रदूषण के खिलाफ इस आंदोलन में पूर्व विधायक शंकर चौधरी भी शामिल हुए। उन्होंने धरना स्थल पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। जालिमों का अत्याचार ज़्यादा दिन नहीं चलेगा। पीड़ितों के दिन ज़रूर बहुरेंगे। उन्होंने कहा कि जनता के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस मुद्दे को हर स्तर पर उठाया जाएगा।
लंबे समय से जारी है संघर्ष
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आंदोलन अचानक नहीं है। वर्षों से बीएफ़सीएल के प्रदूषण के खिलाफ लोग धरना, प्रदर्शन और पदयात्रा करते आ रहे हैं, लेकिन हालात में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। इसी उपेक्षा ने आज जनता को फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया।
जनता की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और प्रबंधन के सामने साफ़ मांगें रखीं, बीएफ़सीएल प्लांट में प्रदूषण पर तत्काल रोक, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्वतंत्र जांच
प्रभावित लोगों को इलाज और मुआवजा
भविष्य में प्रदूषण न हो, इसकी ठोस गारंटी दे। बीएफ़सीएल के प्रदूषण के खिलाफ सुभाष चौक पर उमड़ा जनसैलाब यह साफ संदेश दे गया कि अब जनता चुप नहीं बैठेगी। साँसों पर बन आई इस लड़ाई में लोग निर्णायक संघर्ष के मूड में हैं। अब देखने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन और प्लांट प्रबंधन इस जनआक्रोश को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक प्रदूषण से पीड़ित लोगों को राहत मिलती


