रामगढ़। झारखंड के कुजू गाँव की हवा अब पहले जैसी नहीं रही। एक समय हरे-भरे जंगलों और खेतों से घिरा यह गाँव, आज धुएँ, बीमारी और खामोशी में डूबता जा रहा है। वजह श्रीराम पावर एंड स्टील फैक्ट्री। वे आगे कहते है कि उद्योग विकास की पहचान होते हैं, लेकिन जब वही उद्योग किसी गाँव के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दें, तो यह सोचने का समय है कि आखिर ये कैसा विकास है? कुजू में स्थित श्रीराम पावर एंड स्टील, जो रूंगटा ग्रुप की मिल्कियत है, आज ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन चुकी है।
कहाँ गया वो हरा कुजू?
जिस गाँव में कभी साफ हवा बहती थी, पक्षी चहचहाते थे, अब वहाँ बस काले धुएँ की बदबू है। फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुआँ न केवल पेड़-पौधों को नष्ट कर रहा है, बल्कि ग्रामीणों के फेफड़ों में जहर भर रहा है।
मानव जीवन पर ये पड़ रहा है प्रतिकूल प्रभाव
बच्चे खाँसी और दमे के मरीज बनते जा रहे हैं, बुजुर्गों को साँस लेना मुश्किल हो गया है, खेतों की उपज घट गई है, पीने का पानी तक प्रदूषित हो चुका है।
सरकार और सिस्टम – सब मूक दर्शक क्यों?
गाँव वालों ने कई बार शिकायत की। कभी पंचायत में, कभी ब्लॉक ऑफिस में, और यहाँ तक कि जिला स्तर तक। लेकिन हर बार जवाब आया – “जाँच की जाएगी”। नेता आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, झूठे वादे कर वापस चले जाते हैं।
क्यों नहीं होती कार्यवाही?
क्योंकि श्रीराम पावर एंड स्टील जैसी फैक्ट्रियाँ सरकार को मोटा टैक्स देती हैं, नेताओं को चंदा देती हैं, और अधिकारियों की जेबें गर्म करती हैं। रूंगटा ग्रुप के रसूख के आगे गाँव की पुकार सुनने वाला कोई नहीं।
कुजू का धैर्य अब जवाब दे रहा है
ग्रामवासी अब चुप नहीं बैठेंगे। ये कोई एक की नहीं, पूरी पीढ़ी की लड़ाई है। अब वक़्त आ गया है कि आरटीआई के जरिए फैक्ट्री की प्रदूषण नीति और लाइसेंस की जाँच करवाई जाए। पर्यावरण विभाग को लिखित ज्ञापन सौंपा जाए। जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की जाए ताकि न्यायालय से न्याय मिल सके। मीडिया और सोशल मीडिया के ज़रिए इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया जाए। स्वतंत्र पर्यावरण विशेषज्ञों से फैक्ट्री के प्रभाव की जाँच करवाई जाए।


