रामगढ़। वीर योद्धा शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 13 दिनों तक अपने पैतृक गांव नेमरा में ही रहेंगे। इस दौरान 13वी की पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी। पारंपरिक विधि विधान के अनुसार वह अपने पिता और राजनीतिक गुरु की आत्मा की शांति के लिए मरंग बुरु देवता से प्रार्थना करेंगे। दिवंगत आत्मा की शांति के लिए आयोजित होने वाले अनुष्ठान में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन, भाई बसंत सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य और गांव के लोग शामिल होंगे।
नेमरा से संचालित होगा 13 दिनों तक कार्यालय
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव में रहेंगे तो अस्थाई रूप से कार्यालय का संचालन भी वहीं से होगा। हेमंत सोरेन पर पुत्र के साथ-साथ राज धर्म की भी जिम्मेदारी है। सरकार के कामकाज को भी उन्हें निपटाना है। जिससे जनहित और विकास कार्य किसी भी तरह की रुकावट नहीं हो। मुख्यमंत्री नेमरा से ही सरकार के कामकाज को भी पूरा करेंगे।
आज नेमरा में सुबह का सूरज भी उदास था
आज नेमरा में सुबह का सूरज भी उदास था। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के पुरोधा शिबू सोरेन का निधन से राज्य ही नहीं देश के लिए अपूरणीय क्षति है। मंगलवार को वह पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। लेकिन राज्य की जनता अभी भी दुख के भंवर में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने दुख को सोशल मीडिया पर लिखकर निकलने का प्रयास कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने एक कविता लिखी जिसमें गुरुजी को याद करते हुए आपका वचन निभाऊंगा का वादा किया। गुरु जी का अंतिम संस्कार के दूसरे दिन यानी बुधवार को सोशल मीडिया पर एक लाइन पोस्ट किया हेमंत सोरेन ने लिखा आज नेमरा में सुबह का सूरज भी उदास था।


