जिला प्रशासन पर उठने लगे कई सवाल, आख़िर रात में क्यों होता है अवैध निर्माण?
रामगढ़। शहर के हृदय स्थली माने जाने वाले लोहार टोला में सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दशकों से जिस जमीन पर होलिका दहन और अन्य सामाजिक कार्यक्रम होते आ रहे हैं, उसी जमीन को निशाना बनाकर अब सुनियोजित तरीके से कब्जा किया जा रहा है।
रात के अंधेरे में हो रहा है अवैध कब्जा
स्थानीय निवासियों के बीच जो चर्चा है उसके अनुसार जमीन माफिया द्वारा रात के अंधेरे में अवैध गतिविधियां की जा रही हैं। बिना किसी वैध कागजात के जमीन पर दखल देने की कोशिशें तेज हो गई हैं। जिससे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है।
अरबों की जमीन पर जमीन माफिया की टेड़ी नज़र
बताया जा रहा है कि लोहार टोला स्थित यह जमीन अरबों रुपये मूल्य की है। शहर के बीचों-बीच स्थित होने के कारण इस जमीन पर भू-माफियाओं की नजर लंबे समय से थी और अब मौके का फायदा उठाकर कब्जे की कोशिश की जा रही है।
रांची से जुड़े जमीन माफिया का नेटवर्क सक्रिय
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे खेल के पीछे रांची के जमीन माफिया का नेटवर्क सक्रिय है। जो स्थानीय भू-माफियाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है। बाहर से आए लोग स्थानीय युवकों को आगे कर पूरे खेल को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।
गिरोह के नाम पर धमकी
आरोप है कि रामगढ़ के कुछ युवक, जिन्हें गिरोह का नाम देकर पेश किया जा रहा है, स्थानीय लोगों को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। जमीन पर दावा जताने वालों को खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं।
हथियारों के साथ कब्जे की चर्चा
इलाके में यह चर्चा भी जोरों पर है कि हथियारों के बल पर जमीन कब्जा करने की साजिश रची जा रही है। इससे स्थानीय लोग दहशत में हैं और किसी बड़ी आपराधिक घटना की आशंका जता रहे हैं।
अधिकारियों की छुट्टी बनी माफिया की ताकत
सूत्रों के मुताबिक, जिले के दो बड़े प्रशासनिक अधिकारी फिलहाल छुट्टी पर हैं और इसी का फायदा उठाकर जमीन माफिया सक्रिय हो गया है। प्रशासनिक निगरानी कमजोर पड़ते ही अवैध गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सार्वजनिक जमीन की तत्काल मापी और घेराबंदी कराई जाए। अवैध कब्जे की कोशिश कर रहे लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। इलाके में पुलिस गश्ती बढ़ाई जाए। साथ ही हथियारों की अफवाहों की जांच कर सख्त कदम उठाए जाएं।
सवालों के घेरे में प्रशासन
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर के हृदय स्थल पर स्थित सार्वजनिक जमीन पर अगर इस तरह खुलेआम कब्जे की कोशिश हो रही है, तो प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कहां है? क्या जमीन माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि कानून का डर ही खत्म हो गया है?।


