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Home»झारखंड»रामगढ़»नवरात्र खास: शारदीय नवरात्र पर हैं विशेष महत्व, देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचते हैं साधक, पढ़े खबर
रामगढ़

नवरात्र खास: शारदीय नवरात्र पर हैं विशेष महत्व, देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचते हैं साधक, पढ़े खबर

खबरबोल एडिटरBy खबरबोल एडिटरSeptember 24, 20253 Mins Read
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प्रिंस वर्मा
रजरप्पा। मां छिन्नमस्तिका मंदिर का इतिहास झारखण्ड प्रदेश के रामगढ़ जिला अंतर्गत रजरप्पा स्थित माँ छिन्नमस्तिके मंदिर शक्तिपीठ के रूप में देशभर में काफी लोकप्रिय है। रजरप्पा की भैरवी व दामोदर नदी के संगम पर अवस्थित माँ छिन्नमस्तिके मंदिर आस्था की धरोहर है। मां छिन्नमस्तिका मंदिर के अलावा यहां महाकाली मंदिर, सूर्य मंदिर, दस महाविद्या मंदिर, विशाल शिवलिंग तथा विराट रूप मंदिर हैं। पश्चिम दिशा

से दामोदर तथा दक्षिण दिशा से कल-कल करती भैरवी नदी का दामोदर में मिलना मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है। दामोदर व भैरवी के संगम स्थल के समीप ही माँ छिन्नमस्तिके का मंदिर स्थित है। मंदिर की उत्तरी दीवार के साथ रखे एक शिलाखंड पर दक्षिण की ओर मुख किए मां छिन्नमस्तिके का दिव्य रूप अंकित है। मंदिर के निर्माण काल के बारे में पुरातात्विक विशेषज्ञों में मतभेद है। किसी के अनुसार मंदिर का निर्माण छह हजार वर्ष पहले हुआ था तो कोई इसे महाभारत युग का मानता है। यह दुनिया के दूसरे सबसे बड़े शक्तिपीठ के रूप में देशभर में काफी प्रसिद्ध है। ऐसे असम स्थित मां कामाख्या मंदिर को सबसे बड़ा शक्तिपीठ माना जाता है। मंदिर में बड़े पैमाने पर विवाह भी संपन्न कराए जाते हैं। मंदिर में प्रातःकाल चार बजे माता का दरबार सजना शुरू होता है। भक्तों की भीड़ भी सुबह से पंक्तिबद्ध खड़ी रहती है। खासकर शादी-विवाह, मुंडन-उपनयन के लगन वनवरात्र के अवसर पर देश के विभिन्न प्रांतों से हजारों श्रद्धालु रजरप्पा पहुंचते हैं। मंदिर के आसपास ही फल-फूल, प्रसाद की कई छोटी-बड़ी दुकानें अवस्थित हैं।

नवरात्र में होता है विशेष अनुष्ठान-

नवरात्र के मौके पर मां छिन्नमस्तिका मंदिर में विशेष अनुष्ठान का आयोजन होता है, जो नौ दिनों तक चलता है।जिसमें झारखंड, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश सहित देश के विभिन्न प्रांतों से प्रत्येक वर्ष भारी संख्या में साधक व तांत्रिक नवरात्र में साधना व हवन करने हेतु रजरप्पा पहुंचकर अपनी साधना में लीन रहते हैं। बाहर से आए
साधकों का मानना है कि यहां की गई साधना अत्यंत शक्तिदायी होती है।

कैसे पहुंचे रजरप्पा-

मां छिन्नमस्तिके मंदिर पहुंचने का मार्ग काफी सुगम है। जिला मुख्यालय रामगढ़ से मां छिन्नमस्तिके मंदिर करीब 25 किमी की दूरी पर पक्की सड़क से जुड़ा है। रामगढ़ से करीब 16 किमी की दूरी पर रजरप्पा मोड़ पड़ता है। इस
मोड़ से बोकारो शहर की दूरी करीब 58 किलोमीटर है,जबकि मोड़ से रजरप्पा मंदिर की दूरी 10 किमी है।मोड़ पर बना विशाल प्रवेश द्वार यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करता है। झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर मां छिन्नमस्तिके मंदिर है। रांची से रामगढ़ होते हुए रजरप्पा सीधे पहुंच सकते हैं। वैसे ओरमांझी से सिकिदिरी होते हुए व बोकारो-धनबाद से गोला होकर भी रजरप्पा मंदिर पहुंचने का आसान रास्ता है। जबकि गोला रोड रेलवे स्टेशन से भी मां छिन्नमस्तिके मंदिर पहुंचा जा सकता
है।

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