रामगढ़। चार दिनों तक चलने वाले महापर्व छठ पूजा का समापन मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ हर्षोल्लास और श्रद्धा के वातावरण में हुआ। जिले के सभी घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और परंपरा का अनूठा उदाहरण पेश किया।
भोर की लालिमा में छलकी आस्था
शहर के दामोदर नदी, बिजुलिया तालाब, भुरकुंडा, गोला और कुजू के घाट सहित अन्य इलाकों में सुबह की पहली किरण के साथ ही श्रद्धालु हाथों में बांस की टोकरी लिए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते नजर आए। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर पूजा की डलिया रखकर पूजा संपन्न की।
छठी मइया के गीतों से गूंजा रामगढ़
पूरे रामगढ़ में छठ मइया के भजनों की गूंज रही “केलवा जे फरेला घवद से ओ पिंजरा में…” जैसे गीतों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। कई स्थानों पर स्थानीय कलाकारों और महिलाओं ने पारंपरिक छठ गीतों की प्रस्तुति दी।
साफ-सफाई और सुरक्षा में प्रशासन की तत्परता
इस वर्ष प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी। नगर परिषद, पुलिस विभाग, और आपदा प्रबंधन टीम ने मिलकर घाटों की सफाई, रोशनी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। गोताखोरों की तैनाती और चिकित्सा शिविर भी लगाए गए।
सामूहिकता और सद्भाव का प्रतीक
छठ पूजा ने रामगढ़ में सामाजिक एकता और सौहार्द की मिसाल पेश की। सभी समुदायों के लोगों ने मिलकर पर्व को सफल बनाया। युवाओं की टोली ने घाटों की सजावट और भीड़ नियंत्रण में अहम भूमिका निभाई।
आस्था का महापर्व अगले वर्ष फिर लौटेगा
उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला व्रत पूर्ण किया। परिवार के सदस्य और स्थानीय लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएँ दीं। अब सबकी निगाहें अगले वर्ष के छठ पर्व पर हैं, जब फिर से रामगढ़ की घाटियों में श्रद्धा और आस्था का सागर उमड़ेगा।


