रामगढ़। जिले में लंबे समय से फल-फूल रहे अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ राजधानी से पहुंची विशेष टीम को रात के अंधेरे में निराशा हाथ लगी। गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने देर रात घाटो और कुजू क्षेत्र में छापेमारी की, लेकिन तस्करों की सतर्कता के आगे कार्रवाई बेअसर साबित हुई और टीम को वैरंग वापस लौटना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही टीम के पहुंचने की भनक लगी, अवैध खनन से जुड़े लोग सक्रिय हो गए। रातों-रात खदानों के निकट भंडारण अवैध कोयला को खाली करा दिया गया और मशीनरी व कोयले को सुरक्षित स्थानों पर खपा दिया गया। नतीजतन, टीम को मौके पर कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी।
ख़ाली हाथ लौटी टीम, हरकत में आई रामगढ़ पुलिस
हालांकि, इस असफलता के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन हरकत में आया और अगले ही दिन रामगढ़ पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया। दिन के उजाले में घाटो और कुजू इलाके में व्यापक अभियान चलाया गया। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में कई अवैध मुहानों को बंद कराया गया और खनन स्थलों को ध्वस्त किया गया।
अभियान के दौरान पुलिस ने उन स्थानों को चिन्हित किया, जहां से लंबे समय से अवैध उत्खनन जारी था।
जेसीबी और डोजर से अवैध मुहानों को कराया बंद
जेसीबी और अन्य उपकरणों की मदद से अवैध रास्तों और गड्ढों को पाट दिया गया, ताकि दोबारा खनन न हो सके। साथ ही, मौके से कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में टीम का खाली लौटना इस बात का संकेत है कि अवैध कारोबारियों को पहले से ही सूचना मिल जाती है। वहीं दिन में हुई कार्रवाई को लेकर यह भी चर्चा है कि यह महज औपचारिकता न बन जाए, क्योंकि पहले भी इस तरह के अभियान के बाद कुछ दिनों में फिर से अवैध खनन शुरू हो जाता है।
नहीं होती सख्त कार्रवाई के कारण होती है तस्करी
सूत्रों की मानें तो जब तक इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों चाहे वे तस्कर हों या उन्हें संरक्षण देने वाले पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक इस समस्या पर स्थायी रोक लगाना मुश्किल है। फिलहाल, पुलिस प्रशासन का दावा है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और अवैध कोयला खनन में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई वाकई इस काले कारोबार पर लगाम लगा पाएगी, या फिर यह भी कुछ दिनों की सख्ती बनकर रह जाएगी।


