
लाल सिंदूर से सजी हथेलियां, आंखों में नमी और होठों पर मां दुर्गा के जयकारे के साथ दी गई मां दुर्गा को विदाई
विजयादशमी पर जब विदाई का क्षण आया तो पंचवटी अपार्टमेंट फेस वन परिवार का हर चेहरा भावनाओं से भीग उठा
रामगढ़ जिले के पंचवटी अपार्टमेंट फेस वन में दशहरा के अवसर पर दुर्गा पूजा पंडाल में सिंदूर खेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भक्तों को मंत्रमुग्ध किया
मां दुर्गा की विदाई से पहले पारंपरिक उत्साह और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला
मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी आस्था और भक्ति का प्रदर्शन किया
ढाक की थाप, धार्मिक संगीत और उल्लासमय वातावरण ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जो मां दुर्गा के प्रति समर्पण और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना
उत्सव की शुरुआत से ही प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए
डांडिया फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता डांस परफॉर्मेंस हाऊजी तंबोला इन हाउस डांडिया सहित विभिन्न प्रकार के गेम्स का आयोजन आप भक्तों ने खूब लुफ्त उठाया
रामगढ़। शहर के पंचवटी अपार्टमेंट फेस वन दुर्गा पूजा समिति में शुक्रवार को पंचवटी परिवार के सभी समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक ‘सिंदूर खेला’ की रस्म बड़ी धूमधाम से निभाई गई. नौ दिनों तक चली देवी दुर्गा पूजा के समापन पर इस विशेष रस्म में महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर माता दुर्गा को भावभीनी विदाई दी.
लाल सिंदूर से सजी हथेलियां, आंखों में नमी और होठों पर मां दुर्गा के जयकारे—विजयादशमी पर जब विदाई का क्षण आया तो पंचवटी अपार्टमेंट फेस वन परिवार का हर चेहरा भावनाओं से भीग उठा।.
दुर्गा पूजा पंडाल में सिंदूर खेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भक्तों को मंत्रमुग्ध किया। मां दुर्गा की विदाई से पहले पारंपरिक उत्साह और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।
महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी आस्था और भक्ति का प्रदर्शन किया
मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी आस्था और भक्ति का प्रदर्शन किया। ढाक की थाप, धार्मिक संगीत और उल्लासमय वातावरण ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जो मां दुर्गा के प्रति समर्पण और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना।
बेटी की विदाई, खुशी और गम का संगम
बंगाली परंपरा में देवी दुर्गा को घर की बेटी माना जाता है. दशमी के दिन यह माना जाता है कि बेटी अपने मायके से ससुराल लौट रही है. इसी प्रतीकात्मक विदाई को महिलाएं खुशी और भावनाओं के साथ मनाती हैं. महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं, ढाक की थाप पर नृत्य करती हैं और देवी के समक्ष आशीर्वाद मांगती हैं।
परंपरागत साड़ियों में महिलाओं का नृत्य
इस अवसर पर पूजा परिसर में महिलाओं ने पारंपरिक लाल-सफेद साड़ियों में नृत्य कर माहौल को भक्तिमय बना दिया. सिंदूर से सजे चेहरे और देवी की आराधना के बीच वातावरण भावनाओं से भर गया. इस बीच माता को विदाई देते समय महिलाओं की आंखों में आंसू भी आ गए. विदाई की इस रस्म के साथ नौ दिनों की दुर्गा पूजा समापन हो गया.
खुशी और गम दोनों का दिन
सिंदूर खेला में शामिल बंगाली महिलाओं ने बताया कि “जैसे बेटी अपने घर आती है, वैसे ही हम बंगाली समाज में देवी दुर्गा को अपनी बेटी मानते हैं. नौ दिनों तक उनकी पूजा करते हैं और दशमी के दिन उन्हें विदा करते हैं. यह दिन हमारे लिए खुशी और गम दोनों का होता है, क्योंकि आज हमारी बेटी ससुराल लौट जाती है.” देवी दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन की तैयारी के साथ पूरा पंचवटी परिवार मां की विदाई में भावुक हो उठा.
उत्सव की शुरुआत से ही प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम ओर गेम्स का आयोजित किए गए
पंचवटी अपार्टमेंट श्री श्री दुर्गा पूजा समिति के द्वारा दुर्गा पूजा के पहले दिन से ही प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम ओर अलग अलग तरह के गेम्स आयोजित किए गए। डांडिया फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता डांस परफॉर्मेंस हाऊजी तंबोला इन हाउस डांडिया सहित विभिन्न प्रकार के गेम्स का आयोजन किया गया था। जिसका पंचवटी परिवार के लोगों ने भरपूर लुफ्त उठाया। बेहद सफल रहे दुर्गा पूजा पर्व में समिति के सभी सदस्यों और पंचवटी परिवार के लोगों खास कर महिलायों ने अहम भूमिका निभाई।


